​इश्क़ था..।

भोर भयो दिखी वो कलि, अभी कल ही तो थी ये खिली, यौवन के चरम पे जो आई, साँसे इसने मेरी बहकाई, खुशबू में उसकी, मदहोशी छा गयी, मुस्कुराहट उसकी, आग लगाने लगी, वो लाल लाल, पंखुड़ियां बिछाए, मेरा वक़्त, बस देखने मे गुज़र जाए, कब बेवक़्त हुआ, ये तो पता न चला, सूरज बे-लगाम … Continue reading ​इश्क़ था..।

“कलंकित तू, इंसान”

धुंधली पड़ गयी है नज़र, कान मैं भी पडा है असर, क्या...। कौन सी गलत कार, सुनकर भी न समझे, हुआ बलात्कार, हाल ये सिर्फ मेरा ही नही, आदत है, बात सुन दिल दहकता नहीं, कितने लोग, यूँ शैय्या पर लेट गए, ये तो अब आम सी बात है, न्यूज़ चैनल वाले से वो कह … Continue reading “कलंकित तू, इंसान”